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27 अफसरों का रिटायरमेंट: बचाव या कार्रवाई?

कस्टम, सेंट्रल एक्साइज के भ्रष्ट अफसरों को किया गया रिटायर्ड, सुप्रीमकोर्ट के 2014 में एक फैसले के अनुसार रिटायर्ड हो जाने पर नहीं की सकती अनुशासनिक कार्यवाही

न्‍यूज़लैम्‍प डेस्‍क। केंद्र सरकार ने कस्‍टम व सेंट्रल एक्‍साइज के भ्रष्‍टाचार के मामले में फंसे 15 अफसरों को अनिवार्य सेवानिवृत्‍ति दे दी है। जहां एक ओर सरकार इसे भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध कार्रवाई बता कर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं कानून के जानकारों की माने तो सरकार ने इन भ्रष्‍ट अफसरों को रिटायर्ड कर उनका बचाव किया है। इन भ्रष्‍ट अफसरों को इस लिए रिटायर्ड कर दिया गया कि उन पर किसी भी प्रकार की अनुशासनिक कार्यवाही करना सम्‍भव न हो सके। सवाल ये उठता है कि जब इन भ्रष्‍ट अफसरों पर जांच चल रही है तो ऐसे में सरकार को क्‍या जल्‍दी थी इन्‍हें रिटायर्ड करने की। इनमें से कई ऐसे भी हैं जो निलंबित चल रहे थे इसके बावजूद सरकार ने उन्‍हें रिटायर्डमेंट सम्‍मान से नवाज दिया।

बता दें कि केंद्र सरकार ने कस्टम व सेंट्रल एक्साइज के भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे 15 अफसरों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है। इन अफसरों में प्रिंसिपल कमिश्नर से लेकर असिस्टेंट कमिश्नर स्तर के अफसर शामिल हैं। ये रिटायरमेंट केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के इन अफसरों को वित्त मंत्रालय के एक आदेश में नियम 56 (जे) के तहत की गई। इनमें से कुछ निलंबित चल रहे थे। इनमें से कुछ के खिलाफ सीबीआई ने भ्रष्टाचार के केस किए थे या रिश्वतखोरी, वसूली और आय से अधिक संपत्ति के मामले चल रहे थे। वित्त मंत्रालय ने ट्वीट में कहा- ‘राष्ट्रपति ने भारतीय राजस्व सेवा के 15 अफसरों को 50 साल की उम्र पूरी करने के बाद जनहित में तत्काल प्रभाव सेरिटायर्डकर दिया है।’ इन सभी 15 अधिकारियों को तीन महीने के वेतन और भत्ते दिए जाएंगे। नियम 56 (जे) के तहत जनहित में किसी भी सरकारी अधिकारी को तीन माह की नोटिस अवधि के साथ सेवामुक्त किया जा सकता है।

  • इन पर भी कार्रवाई

कमिश्नर – संसार चंद, काेलकाता (घूसखोरी), जी श्री हर्षा, चेन्नई (आय से अधिक संपत्ति केस), अतुल दीक्षित, विनय बृज सिंह
एडीशनल कमिश्नर – अशोक महीदा, वीरेंद्र अग्रवाल
डिप्टी कमिश्नर – अमरेश जैन, दिल्ली जीएसटी जोन (आय से अधिक संपत्ति), अशोक असवाल, दिल्ली
असिस्टेंट कमिश्नर – एसएस पबाना, एसएस बिष्ट, विनोद सांगा, राजू सेकर, मोहम्मद अल्ताफ (इलाहाबाद)
रंजिश के कारण कार्रवाई : अनूप श्रीवास्तव जबरनरिटायर्डकिए गए कमिश्नर और भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी संघ के प्रमुख अनूप श्रीवास्तव ने आरोप लगाया है कि राजस्व सचिव अजय भूषण पांडेय मुझसे रंजिश रखते हैं। भ्रष्टाचार के आरोप गलत हैं और इन मामलों में अदालतों ने उनको बरी कर दिया है। मुख्य आयुक्त के पद पर प्रमोशन की फाइल जांच पड़ताल के बाद विभाग से संघ लोक सेवा आयोग को भेजी गई थी। आयोग ने पिछले साल 20 दिसंबर को समीक्षा बैठक भी तय कर दी थी। लेकिन नए राजस्व सचिव पांडेय ने फाइल वापस बुला ली।

सेवानिवृत्ति के बाद जारी नहीं रखी जा सकती अनुशासनिक कार्यवाही: सुप्रीमकोर्ट
किसी कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही उसकी सेवानिवृत्ति के बाद जारी नहीं रह सकती। ऐसा तभी हो सकता है जब ऐसी कार्रवाई उस खास सेवा को नियंत्रित करने वाले नियमों के तहत अधिकृत हो। सुप्रीम कोर्ट ने एक सेवानिवृत्त इंजीनियर की अपील स्वीकार करते हुए यह व्यवस्था 2014 में दी। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को दरकिनार करते हुए अनुशासनिक कार्यवाही के तहत बर्खास्त उस कर्मचारी को बकाया वेतन और भत्ता भुगतान करने का निर्देश दिया था। न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर एवं सी नागप्पन की पीठ ने उत्तर प्रदेश सहकारिता कर्मचारी सेवा नियमावली, 1975 के प्रावधानों के आलोक में कहा कि इसमें सेवानिवृत्ति के बाद अनुशासनिक कार्यवाही शुरू करने या जारी रखने का कोई प्रावधान नहीं है। न ही ऐसा कोई प्रावधान है कि कदाचार प्रमाणित हो गया हो तो सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ से कटौती की जाए। पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता सहायक इंजीनियर देव प्रकाश तिवारी जब 31 मार्च 2009 को सेवानिवृत्त हो गया तो प्रतिवादियों के पास अनुशासनिक कार्यवाही जारी रखने का कोई अधिकार नहीं था। अपीलकर्ता को देय सेवानिवृत्ति के लाभ से किसी तरह की कटौती करने का भी अधिकार नहीं था। ऐसे में निश्चित रूप से यह माना जाएगा कि जांच खारिज हो चुकी है और अपीलकर्ता सेवानिवृत्ति का पूरा लाभ पाने का हकदार है। इस तरह प्रतिवादियों को अपीलकर्ता को देय वेतन व भत्ते का बकाया के साथ नियमों के तहत सेवानिवृत्ति के सभी लाभ का देने का इस तरह से निर्देश दिया जाता है मानों उसके खिलाफ किसी अनुशासनिक कार्यवाही का आदेश पारित नहीं किया गया। तिवारी के खिलाफ वर्ष 2006 में अनुशासनिक कार्यवाही शुरू की गई थी। कोर्ट ने सरकारी विभाग और लखनऊ स्थित यूपी को-ऑपरेटिव इंस्टीट्यूशनल सर्विस बोर्ड को बर्खास्तगी की अवधि से लेकर सेवानिवृत्ति के दिन तक बकाया वेतन और भत्ता भुगतान करने का आदेश दिया।

नसीम अहमद सिद्दकी अधिवक्‍ता

प्रिंसिपल कमिश्नर अनूप श्रीवास्तव पर कई मामले थे : बर्खास्त किए गए अफसरों में प्रिंसिपल कमिश्नर अनूप श्रीवास्तव भी शामिल हैं जो दिल्ली में सीबीआईसी में प्रिंसिपल एडीजी (ऑडिट) थे। सूत्रों ने बताया कि 1996 में सीबीआई ने अनूप के खिलाफ आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया था और आरोप लगाया था कि उन्होंने बिल्डिंग सोसायटी को फायदा पहुंचाया, जो कानून के खिलाफ जाकर जमीन खरीद के लिए एनओसी पाने की कोशिश कर रही थी। सीबीआई ने 2012 में भी अनूप श्रीवास्तव के खिलाफ कर चोरी मामले को ढंकने के लिए एक इम्पोर्टर से कथित तौर पर घूस मांगने और लेने का मामला दर्ज किया था। उनके खिलाफ उत्पीड़न व जबरन वसूली की शिकायतें भी की गई थीं। निलंबित ज्वाइंट कमिश्नर नलिन को भी छुट्टी दे दी गई है। उनके खिलाफ सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति समेत कई केस दर्ज किए थे।

  • पहले 12 अफसरों को दिया गया रिटायरमेंट

वित्त मंत्रालय ने भ्रष्टाचार के आरोप में लिप्त 12 वरिष्ठ अफसरों को अनिवार्य तौर पररिटायर्डकर दिया है। इन अफसरों में आयकर विभाग के चीफ कमिश्नर के साथ-साथ प्रिंसिपल कमिश्नर जैसे पदों पर तैनात रहे अधिकारी भी शामिल हैं। इनमें 1985 बैच के आईआरएस अशोक अग्रवाल का नाम सबसे ऊपर है। आयकर विभाग में ज्वाइंट कमिश्नर रैंक के अफसर अग्रवाल ईडी के संयुक्त निदेशक रहे हैं और भ्रष्टाचार के आरोप में 1999 से 2014 के बीच निलंबित रहे हैं। इन पर कारोबारियों से वसूलीव तांत्रिक चंद्रास्वामी की मदद का आरोप रहा है। 1985 बैच के आईआरएस अधिकारी होमी राजवंश को सेवानिवृत्ति दी गई है। उन पर पद का गलत इस्तेमाल करते हुए संपत्ति अर्जित करने का केस चला और सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया। तभी से वो निलंबित हैं। नोएडा के कमिश्नर (अपील) रहे 1989 बैच के आईआरएस एसके श्रीवास्तव को भी सेवानिवृत्त किया गया है। इन पर कमिश्नर रैंक की दो महिला आईआरएस के साथ यौन शोषण करने का आरोप है। अन्य अफसरों में बी बी राजेंद्र प्रसाद, बी अरुलप्पा, अशोक मित्रा, चंदर सैनी भारती,अंदासु र्रंवदर, श्वेताभ सुमन, विवेक बत्रा व राम कुमार भार्गव शामिल हैं। सभी महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत थे जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप रहे हैं।

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