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पीएम मोदी को चुनाव आयोग अब तक आठ मामलों दे चुका है क्‍लीनचिट?

कांग्रेस को अब सुप्रीम कोर्ट से उम्‍मीद, आयोग ने मोदी को कर्नाटक के चित्रदुर्ग में नौ अप्रैल को उनके द्वारा दिये गये भाषण के सिलसिले में भी पाक साफ करार दिया

ई दिल्ली। चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो और मामलों में क्लीनचिट दी है। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि मोदी ने 23 अप्रैल को अहमदाबाद में रोडशो किया। सूत्रों के मुताबिक आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि पीएम मोदी ने आदर्श आचार संहिता और चुनाव कानून का कोई उल्लंघन नहीं किया। सूत्रों ने बताया कि आयोग ने मोदी को कर्नाटक के चित्रदुर्ग में नौ अप्रैल को उनके द्वारा दिये गये भाषण के सिलसिले में भी पाक साफ करार दिया। चित्रदुर्ग में उन्होंने अपने चुनावी भाषण में नये मतदाताओं से अपना वोट बालाकोट हवाई हमले के नायकों को समर्पित करने का कथित रूप से आह्वान किया था। उसी दिन उन्होंने महाराष्ट्र में लातूर जिले के औसा में भी ऐसी ही अपील की थी।

आयोग ने इस मामले में भी उन्हें क्लीन चिट दी थी लेकिन चुनाव आयुक्तों में एक ने इस मामले में असहमति व्यक्त की थी। वैसे आयोग ने अब तक अपने इन दोनों फैसलों को सार्वजनिक नहीं किया है लेकिन इन दोनों फैसलों के साथ ही मोदी को अब तक आठ मामलों में क्लीनचिट मिल चुकी है। समझा जाता है कि गुजरात के निर्वाचन कार्यालय का मानना है कि प्रथम दृष्टया कोई उल्लंघन नहीं पाया गया। कांग्रेस यह आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग गई थी कि मोदी ने वोट डालने के बाद आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए रोडशो निकाला और राजनीतिक टिप्पणी की। पहले चुनाव आयोग मोदी के छह भाषणों, शाह के दो भाषणों और कांग्रेस प्रमुख के एक भाषण को सही ठहरा चुका है।

चुनाव आयोग द्वारा पीएम मोदी और अमित को क्लीनचिट दिए जाने के बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के मामले में क्लीनचिट दिए जाने के निर्वाचन आयोग के आदेश से संबंधित सबूत ऑन रिकॉर्ड अदालत में पेश करें। देव की तरफ से वरिष्ठ वकील ए. एम. सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने कई बार आयोग में इस बात को लेकर शिकायत की है कि प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष जानबूझ कर प्रचार अभियान के दौरान सुरक्षाबलों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो आचार संहिता का उल्लंघन है, लेकिन चुनाव आयोग शिकायतों को खारिज कर रहा है।

सिंघवी ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग के कई आदेशों में उनके ही कुछ अधिकारियों की असहमति की टिप्पणियां हैं। सिंघवी ने कहा, ‘अदालत को दिशानिर्देश तय करना चाहिए, क्योंकि यह मूल संरचना से संबंधित है और सभी मामलों में अधिकारी के असहमतियों का खुलासा किया जाना चाहिए।। शीर्ष अदालत को कुछ आदेशों पर गौर करना चाहिए।’

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