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बच्‍चो के खाना खाते समय मोबाइल रखें दूर

सीफार के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में मेडिकल कालेज के डॉक्टर्स ने बताए उपाय

प्रयागराज। बच्चों को सही पोषण मिले इसके लिए जरूरी है उन्हें खाना देते समय मोबाइल का इस्तेमाल न करने दें, बल्कि उन्हें रोचक कहानियां सुनाएं। बच्चों को अलग से कटोरी और चमच्च से आहार दें ताकि यह अनुमान लगाया जा सके कि बच्चे को पर्याप्त आहार मिला या नहीं। यह कहना है बाल विकास परियोजना अधिकारी अरविंद व्यास का। वह शुक्रवार को नगर स्थित एक होटल में सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रीसर्च (सीफार) के सहयोग से ऊपरी आहार पर आयोजित परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे।

बाल विकास परियोजना अधिकारी ने कहा कि आजकल मोबाइल की उपयोगिता बढ़ी है लेकिन बच्चों को आहार देते समय माताओं को मोबाइल से दूर रहना चाहिए। ताकि वह बच्चे की पसंद और नापसंद को समझ सकें। साथ ही उन्होने कहा कि ऊपरी आहार के नाम पर बाजार में मिल रहे रेडीमेड उत्पादों को कम उपयोग करें।

सरोजनी नायडू चिलड्रन हास्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मनीषा ने बताया कि हर मां के स्तन के आकार अलग हो सकता है लेकिन दूध सबसे बराबर मात्रा में ही स्रवित होता है। इसलिए हर मां को दो साल तक अवश्य स्तनपान कराना चाहिए। साथ ही हर मां को छह माह बाद स्तनपान के साथ ऊपरी आहार जरूर देना चाहिए। बच्चे का वजन बढ़ रहा है और वह 24 घंटे में 6 से 8 बार अगर पेशाब कर रहा है तो मां को समझ लेना चाहिए कि उसे पर्याप्त मात्रा में दूध बन रहा है। इस मां को छह माह तक अपना दूध ही पिलाना चाहिए।

खाना खाते समय मोबाइल का उपयोग करती बच्‍ची।

सरोजनी नायडू चिलड्रन हास्पिटल के मेडिकल आफिसर डॉक्टर मृदुला व्यास ने बताया कि प्रसव के बाद मां को एक घंटे के अंदर अपना ही पीला गाढ़ा दूध पिलाना चाहिए। क्योंकि उसमें कोलेस्ट्रम होता है जो बच्चे को कई बीमारियों से बचाता है। बच्चे को छह माह से पहले पानी भी नहीं पिलाना चाहिए। क्योंकि स्तनपान से उसे पर्याप्त मात्रा में पानी मिलता रहता है।

बाल विकास पुष्टाहार अधिकारी विमल कुमार चौबे ने प्रोजेक्टर के जरिये एक हजार दिन के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होने पोषण के 5 सूत्रों का भी जिक्र किया जिसे अपनाने से बच्चे का पूर्ण विकास संभव है। यूनिसेफ के मंडलीय सलाहकार सुधा सिंह ने बताया कि ऊपरी आहार देते समय बच्चों को कहानी सुनानी चाहिए। इससे रोचकता बढ़ती है और बच्चा भरपेट भोजन भी कर लेता है। बच्चे को कटोरी और चम्मच से खाने की आदत डालनी चाहिए। उन्होने बताया की कुपोषण के कई कारण होते हैं। यदि मां कुपोषित है तो बच्चा भी कुपोषित होगा। संक्रमण के कारण भी बच्चा कुपोषित हो सकता है। बच्चा यदि बीमार है तो डॉक्टर की सलाह पर ही उसका आहार बंद करना चाहिए।

उत्तर प्रदेश तकनीक सहयोगी इकाई की प्रिया चतुर्वेदी ने ऊपरी आहार का महत्व बताते हुये कहा कि स्वस्थ्य शरीर में ही स्वस्थ्य मस्तिष्क निवास करता है। इस अवसर शहरी क्षेत्र की कई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और लाभार्थी मौजूद रहीं। कार्यक्रम के दौरान कई लाभार्थियों ने पोषण संबंधी सवाल भी पूछे। विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों को हरी सब्जियां, पीले फल खिलाना चाहिए। बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए रोटी और चावल जरूर खिलाएं। विशेषज्ञों ने बच्चों को शुद्ध पानी पिलाने पर ज़ोर दिया।

नेवराबादवासी कविता ने बताया कि टीकाकरण के बारे में जानकारी नहीं थी लेकिन आंगनबाड़ी केंद्र से पूरी जानकारी मिली। अब मैं समय-समय पर टीकाकरण करा रही हूँ। कुपोषण के बारे में भी जानकारी मिली। बेली रोड की रहने वाली उषा देवी ने बताया कि मुझे हरी सब्जियों के महत्व की पूरी जानकारी आंगनबाड़ी केंद्र से ही मिली। अब मैं नियमित रूप से हरी सब्जियां खा रही हूँ।

कटोरी चम्मच के फायदे

  • बच्चे को पर्याप्त मात्रा में व सही समय पर आहार मिलता है
  • बच्चे को अलग से पौष्टिक आहार बनाकर दिया जा सकता है
  • बच्चे ने कितना आहार लिया इसकी सही जानकारी रहती है

छह माह के बच्चे को क्या खिलाएं

  • मां के दूध के साथ ऊपरी आहार भी दे इसके लिए घर का बना हुआ मसला और गाढ़ा ऊपरी आहार जैसे कद्दू, लौकी, गाजर, पालक, दाल और यदि मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस व मछली भी देना चाहिए
  • बच्चे के खाने मे ऊपर से एक चम्मच घी, तेल या मक्खन मिलाएं
  • बच्चे के खाने में नमक, चीनी और मसाले की मात्रा कम ही रखें
  • बच्चे का खाना रुचिकर बनाने के लिए स्वाद व रंग शामिल करें
  • बच्चे को बाजार का बिस्कुट,चिप्स, मिठाई और जूस आदि न दें
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