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ना लोकतंत्र, ना कानून, ये है भीड़तंत्र का राज?

सरकार बनने के साथ ही हमलों में हुई बढ़ोत्तरी

न्‍यूज़लैम्‍प डेस्‍क। देश में भाजपा सरकार की वापसी के साथ ही एक बार फिर से भीड़तंत्र का राज पूरे देश में कायम हो रहा है। वर्चस्‍व और जात-पात के नाम पर लगातार कमजोर वर्गों को निशाना बना रही है। इस भीड़ को किसकी सह प्राप्‍त है। किसके इशारे पर ये काम करते हैं। तमाम जांच एजेंसियां होने के बाद भी इसकी जानकारी नहीं है। इस भीड़ को ना कानून का डर, ना ही सजा भय, ये इस प्रकार लोगों को अपना शिकार बनाते हैं, जैसे वे किसी बदले की नियत कर रहे हों। हद तो ये है कि ये भीड़ जब किसी को अपना निशाना बना रही होती है तो उस समय उनके ही बीच से कोई व्‍यक्‍ति इसका वीडियो भी बना रहा होता है।

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इससे स्‍पष्‍ट से कि इस भीड़तंत्र का मकशद मात्र किसी समुदाय को नुकसान पहुंचाना ही नहीं बल्‍कि वे हमले का वीडियो वायरल कर समाज के बीच दहशत भी फैलाना चाहते है। शासन-प्रशासन की कार्रवाई तभी जोर पकड़ती है जब तक मीडिया उसे हवा न दे। मामला यदि सत्‍ता पक्ष से जुड़ा हो तो उसे दबाने का हर सम्‍भव प्रयास किया जाता है।

अब देश के नागरिकों अब तय करना होगा कि वे समाज को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। यही नहीं इसके साथ ही सरकार भी इस प्रकार के सभी मामलों को लेकर अपनी भूमिका तय करनी होगी। कुछ माह पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने भी मॉब लिचिंग को लेकर सख्‍त टिप्‍पणी करते हुए ऐसे प्रकरण में जो भी दोषी हों उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्‍चित करने का आदेश दिया, लेकिन इसके बाद भी भीड़तंत्र का हमला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भीड़ कानून को धता बताते हुए खून की होली खुलेआम खेल रही है। सोशल मीडिया के तमाम प्‍लेटफार्म पर इस प्रकार के वीडियो को शेयर भी खूब किया जा रहे हैं।

भीड़तंत्र का इस प्रकार किसी पर हमला किसी व्यक्ति पर नहीं बल्कि लोकतंत्र व कानून पर भी हमला है। ये हमला सरकार व सरकार की नीतियों पर भी है। क्योंकि इस प्रकार हमला करने वाले लोग ना ही लोकतंत्र में, ना ही सरकार में और ना ही कानून में विश्वािस रखते हैं। ये गुट बनाकर अपने-अपने क्षेत्रों में अपनी ही सरकार, अपना ही लोकतंत्र और अपना ही कानून चलाकर किसी को भी दोषी करार देकर अमानवीय तरीके से सजा देने लगते है। बेहद जरूरी है की सरकार इस प्रकार लोगों पर हमला करने वाले गुटों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करे। जिससे देश के नागरिकों को सरकार व कानून के प्रति विश्वारस बढ़े और वह बेखौफ जी सके। जिससे भीड़तंत्र का राज खत्म हो सके।

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